Tajdar e Haram Ho Nigahe Karam Lyrics in Hindi

 

क़िस्मत में मेरी चैन से जीना लिख दे
डूबे न कभी मेरा सफ़ीना लिख दे
जन्नत तो ठिकाना है मगर दुनिया में
ऐ कातिबे-तक़दीर मदीना लिख दे

ताजदारे-हरम हो निग़ाहे-करम
हम ग़रीबों के दिन भी संवर जाएंगे
हामिये-बेकशां क्या कहेगा जहाँ
आप के दर से ख़ाली अगर जाएंगे

चश्मे-रहमत बकुशा सूए मनन्दाज़े-नज़र
ऐ कुरैशी लक़बो-हाशमीयो-मुत्तलबी

ताजदारे-हरम हो निग़ाहे-करम

का तुमसे कहूं ऐ अरब के कुंवर
तुम जानत हो मन की बतियां
दर फुरक़ते-तो ऐ उम्मी लक़ब
काटे न कटत हैं अब रतियां
तोरी प्रीत में सुध-बुध सब बिसरी
कब तक ये रहेगी बेख़बरी
गाहे बफ़िगन दुज़दीदा नज़र
कभी सुन भी तो लो हमरी बतियां

ताजदारे-हरम हो निग़ाहे-करम

कोई अपना नहीं ग़म के मारे हैं हम
आप के दर पे फ़रियाद लाए हैं हम
हो निगाहे-करम वरना चोखट पे हम
आपका नाम ले ले के मर जाएगें

ताजदारे-हरम हो निग़ाहे-करम

मय कशो आओ आओ मदीने चले
चश्मे-साक़ीये-कोसर से पीने चले
याद रखो अगर उठ गई एक नज़र
जितने ख़ाली हैं सब जाम भर जाएंगे

ताजदारे-हरम हो निग़ाहे-करम

खौफे-तूफ़ान है, बिजलियों का है डर
सख्त मुश्किल है आक़ा किधर जाएं हम
आप ही गर न लेंगे हमारी ख़बर
हम मुसीबत के मारे किधर जाएंगे

ताजदारे-हरम हो निग़ाहे-करम
हम ग़रीबों के दिन भी संवर जाएंगे

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