Imam Husain Mankabat and Shahidi Kalam

 

Aap Ki Nisbat Ae Nana-e-Husain

 

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन ! / Aap Ki Nisbat Ae Nana-e-Husain ! Hai BaDi Daulat Ae Nana-e-Husain !
आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दूर कर फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन ! अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !

ग़म तुम्हारा चैन लेने ही न दे, दे दो ये राहत ऐ नाना-ए-हुसैन !
अब मदीने में बुला कर दूर कर, ये ग़म-ए-फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन !

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दूर कर फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन ! अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

मैं मदीने का मुसाफ़िर अब बनूँ, कीजिए रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन !
चल मदीना की बिशारत दीजिए, कीजिए रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन !

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दूर कर फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन ! अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

अपना ग़म और चश्म-ए-नम दे दीजिए, कीजिए रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन !
इश्क़ में आहें भरूँ, रोता रहूं, कीजिए रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन !

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दूर कर फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन ! अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

अपने जल्वों से अता फ़रमाइए, नज़ाअ’ में राहत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दो बक़ीअ-ए-पाक में दो-गज़ ज़मीं, तुम प-ए-क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दूर कर फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन ! अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

दावत-ए-इस्लामी वालों पर सदा, कीजिए रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन !
हर वली का वास्ता ! अत्तार पर कीजिए रहमत ऐ नाना-ए-हुसैन !

आप की निस्बत ऐ नाना-ए-हुसैन ! है बड़ी दौलत ऐ नाना-ए-हुसैन !
दूर कर फ़ुर्क़त ऐ नाना-ए-हुसैन ! अपनी दे क़ुर्बत ऐ नाना-ए-हुसैन !

मेरे ख़ुदा की रिज़ा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर / Mere Khuda Ki Riza Hain Ali Ke Lakht-e-Jigar
तेरा हुसैन, मेरा हुसैन
सब का हुसैन, मौला हुसैन

या शहीद-ए-कर्बला, या शहीद-ए-कर्बला

मेरे ख़ुदा की रिज़ा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर
नबी के दीं पे फ़िदा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

शहज़ादा अली का, प्यारा है नबी का
ज़हरा का लाडला, महबूब सभी का

फ़क़ीरों आओ ! सदा दे रहे हैं ये अब्बास
सरापा बाब-ए-सख़ा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

शहज़ादा अली का, प्यारा है नबी का
ज़हरा का लाडला, महबूब सभी का

हुसैनी ख़ून से वो इंक़िलाब आया है
मिटा है कुफ्र, बक़ा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

तेरा हुसैन, मेरा हुसैन
सब का हुसैन, मौला हुसैन

मेरे रसूलने सरदार-ए-ख़ुल्द इन को चुना
तभी तो सब से जुदा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

शहज़ादा अली का, प्यारा है नबी का
ज़हरा का लाडला, महबूब सभी का

उखाड़ फ़ेंको जहाँ से यज़ीदियत का अलम
तुम्हारे साथ सदा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

शहज़ादा अली का, प्यारा है नबी का
ज़हरा का लाडला, महबूब सभी का

पीला गए हैं वो पानी सुलगती रेती को
मक़ाम-ए-सब्र-ओ-वफ़ा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

तेरा हुसैन, मेरा हुसैन
सब का हुसैन, मौला हुसैन

क़याम फ़िक्र हो क्यूँ ! दिल तेरा हुसैनी है
मरीज़-ए-दिल की दवा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर
अली के लख़्त-ए-जिगर, अली के लख़्त-ए-जिगर

शहज़ादा अली का, प्यारा है नबी का
ज़हरा का लाडला, महबूब सभी का

मेरे ख़ुदा की रिज़ा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर
नबी के दीं पे फ़िदा हैं अली के लख़्त-ए-जिगर

मेरे प्यारे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे प्यारे हुसैन

 

Shah-Savaar-e-Karbala Ki Shah-Savaari Ko Salam

शह-सवार-ए-कर्बला की शह-सवारी को सलाम /
शह-सवार-ए-कर्बला, शह-सवार-ए-कर्बला

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

शह-सवार-ए-कर्बला की शह-सवारी को सलाम
नेज़े पर क़ुरआन पढ़ने वाले कारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

रात-दिन बिछड़े हुओं की याद में रहना खड़े
ऐ हज़ीं सुब्हों ! तुम्हारी इंतिज़ारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

घर का घर सब लुट गया लेकिन निगाह उट्ठी नहीं
सय्यिदा ज़ैनब ! तुम्हारी पर्दा-दारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

मुस्कुराके पेश तेग़ों के किया रंगीं शबाब
अकबर-ओ-क़ासिम ! तुम्हारी जाँ-निसारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

काँप उट्ठा है अर्श भी और आसमां थर्रा गया
असग़र-ए-मज़लूम ! तेरी बे-क़रारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

पी के साइम झूमता था जिस को कर्बल का शहीद
वादा-ए-इश्क़-ए-नबी ! तेरी ख़ुमारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

शह-सवार-ए-कर्बला की शह-सवारी को सलाम
नेज़े पर क़ुरआन पढ़ने वाले कारी को सलाम

अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम
अस्सलाम – अस्सलाम या इमाम आली मक़ाम

 

Mere Dil Ki Satah Par Hai Qadam Zahra Ke Bachchon Ka

मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का
मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का
मेरी नस्लों पे है दस्त-ए-करम ज़हरा के बच्चों का

मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का

ज़माने का कोई भी रंज उसे रुस्वा नहीं करता
सुकूनत पाले जिस सीने में ग़म ज़हरा के बच्चों का

मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का

ख़ुदा के फ़ज़ल से इज़्न-ए-ज़ियारत का शरफ़ पाया
ज़हे क़िस्मत मैं देख आया हरम ज़हरा के बच्चों का

मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का

हज़ारों कोशिशें कर ली ज़माने ने झुकाने की
मुझे झुकने नहीं देता भरम ज़हरा के बच्चों का

मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का

गुलिस्तान-ए-पयम्बर का हर एक गुल है गुल-ए-तनवीर
मुमासिल ही नहीं, रब की क़सम ! ज़हरा के बच्चों का

मेरे दिल की सतह पर है क़दम ज़हरा के बच्चों का
मेरी नस्लों पे है दस्त-ए-करम ज़हरा के बच्चों का

 

Ae Raah-e-Haq Ke Shahidon

ऐ राह-ए-हक़ के शहीदों
ऐ राह-ए-हक़ के शहीदों ! वफ़ा की तस्वीरों !
तुम्हें वतन की हवाएं सलाम कहती हैं

ऐ राह-ए-हक़ के शहीदों !

चले जो होगे शहादत का जाम पी कर तुम
रसूल-ए-पाक ने बाहों में ले लिया होगा
अली तुम्हारी शुजाअत पे झूमते होंगे
हुसैन-पाक ने इरशाद ये किया होगा
तुम्हें ख़ुदा की रिज़ाएं सलाम कहती हैं

ऐ राह-ए-हक़ के शहीदों !

लगाने आग जो आए थे आशियाने को
वो शो’ले अपने लहू से बुझा दिए तुमने
बचा लिया है यतीमी से कितने फूलों को
सुहाग कितनी बहारों के रख लिए तुमने
तुम्हें चमन की फ़ज़ाएँ सलाम कहती हैं

ऐ राह-ए-हक़ के शहीदों !

जनाब-ए-फ़ातिमा, जिगर-ए-रसूल के आगे
शहीद हो के किया माँ को सुर्ख़-रू तुमने
जनाब-ए-हज़रत-ए-ज़ैनब गवाही देती हैं
शहीदों ! रखी है बहनों की आबरू तुमने
वतन की बेटियाँ, माँएं सलाम कहती हैं

ऐ राह-ए-हक़ के शहीदों !

लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन
लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन

पुश्तों से मैं नसीर हूँ मंगता हुसैन का
विरसे में मैंने पाया है सदक़ा हुसैन का

लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन
लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन

सितम के मुक़ाबिल मददगार शाह हुसैन
अल्लाह के शेरों के सरदार शाह हुसैन
जब जब हो मुश्किल हो ललकार शाह हुसैन
विर्द हमारा लबों पे है शाह हुसैन

इस का सबूत दे दिया असग़र की जंग ने
शेरों का शेर होता है बच्चा हुसैन का

लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन
लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन

काफ़ी है मेरे वास्ते नक़्दे ग़मे-हुसैन
चलता है हर जहान में सिक्का हुसैन का

लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन
लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन

नबियों की रोज़े हश्र ये फरमाइशें न हो
अज़ान हो बिलाल की सजदा हुसैन का

लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन
लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन

मीज़ाने-हश्र की मुझे क्या फ़िक्र हो नसीर
भारी हमेशा रेहता है पल्ला हुसैन का

लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन
लजपाल हुसैन, लजपाल हुसैन

शायर:
पीर नसीरुद्दीन नसीर

 

 

Dil Thikana Mere Husain Ka Hai

दिल ठिकाना मेरे हुसैन का है
क़त्ले-हुसैन अस्ल में मर्गे-यज़ीद है
इस्लाम ज़िंदा होता है हर करबला के बाद

मेरे हुसैन… मेरे हुसैन…

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

दिल ठिकाना मेरे हुसैन का है
हर ज़माना मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

जिस के साये में काएनात है सब
ऐसा नाना मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

ये जो काबा है तुम न समझोगे
घर पुराना मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

मारे एक सब्र से हज़ार अ़दू
क्या निशाना मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

बाब-ए-ख़ैबर जिसने उखाड़ दिया
ऐसा बाबा मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

मेरे घर में चराग़ जलते हैं
आना जाना मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है
मेरे हुसैन का है, मेरे हुसैन का है

मेरे हुसैन… मेरे हुसैन…

 

Shamshir Karbala Mein Uthai Husain Ne

 

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

ऐसा लगा के आ गए मैदान में अली
जब रन में ज़ुल्फ़िक़ार चलाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

लगता था जैसे इश्क़ का काबा झुका हुवा
सजदे में जब ज़बीन झुकाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

जन्नत में ला के सूए जहन्नम से खींच कर
क़िस्मत जनाबे-हुर्र की जगाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

हाथों में ले के असग़रे-मज़लूम का लहू
ज़ुल्मों-सितम की आग बुझाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

एक इन्क़िलाब आ गया मैदाने-जंग में
अकबर को जब ज़बान चुसाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

तयबा है दर्सगाह, मदरसा शहे-उमम
तालीम इस तरह से है पाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

सर कट गया है फिर भी नेज़े की नोक पर
आयत कलामे-हक़ की सुनाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

मुमताज़ करबला से सदा आती है यहीं
बिगड़ी हर एक बात बनाई हुसैन ने

शमशीर करबला में उठाई हुसैन ने
अज़मत नबी के दीं की बचाई हुसैन ने

 

 

Agar Husaini Ho

 

अगर हुसैनी हो
मुआशरे को बुराई से पाक कर डालो
हर एक शर को मिटाओ अगर हुसैनी हो

हुसैनियत का मिशन सुनो, हुसैनी बन के जियो
हुसैनियत का मिशन सुनो, हुसैनी बन के जियो

लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन
लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

निज़ामे-हक़ को बचाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

यज़ीदियत को मिटाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

लगादो जान की बाज़ी बक़ा-ए-हक़ के लिये
वफ़ा का अहद निभाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

हुसैन ज़िंदा ज़मीरी की एक अलामत है
ख़ुदी हयात में लाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन
लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन

उन्हों ने मौत के शोलों पे भी नमाज़ पड़ी
नमाज़ें अपनी बचाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

कभी किसी को घटा कर न बड़े होगे तुम
खुद अपने कद को बढ़ाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन
लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन

जुलूसो-जलसाओ-नारा ही बस नहीं सब कुछ
अमल भी कर के दिखाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

नबी की इज़्ज़तो-नामूस के तहफूज़ पर
जवानी अपनी लुटाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन
लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन

हुसैन वारिसे-इल्मे-नबी को केहते हैं
पढ़ो, पढ़ाओ, सिखाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

सुनो फरीदी मुहर्रम का है यहीं पैग़ाम
अलम न हक़ का झुकाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

निज़ामे-हक़ को बचाओ

अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो
अगर हुसैनी हो, अगर हुसैनी हो

लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन
लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन, लब्बैक लब्बैक मौला हुसैन

Allah Ki Raza Hai Muhabbat Husain Ki (Ya Husain Ibne Ali)

 

अल्लाह की रज़ा है मुहब्बत हुसैन की (या हुसैन इब्ने-अली)
तुम हो जाने-नबी, तुम हो जाने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

अल्लाह की रज़ा है मुहब्बत हुसैन की
लिखता हूं ख़ूने-दिल से शहादत हुसैन की

या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

जब करबला में आए दुलारे बतूल के
शेरे-ख़ुदा के लाल, नवासे रसूल के

चारो तरफ से घेर लिया फौजे-शाम ने
ये ज़ुल्म सय्यिदों पे किया फौजे-शाम ने

एक ज़ख़्म दिल पे और भी गहरा लगा दिया
दरिया पे भी लईनों ने पहरा लगा दिया

या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

ज़ैनब ने जब निग़ाहों से देखा ये माजरा
आ कर कहा हुसैन से भैय्या सुनो ज़रा

करती हूं इस ग़रीबी में एक आख़री सुवाल
ख़िदमत मे लेकर आई हूं मैं अपने दोनों लाल

माना की ये तुम्हारी बहन का करार हैं
प्यारे हुसैन तुझ पे ये बच्चे निसार हैं

या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

असग़र अली भी राही-ए-बाग़े-इरम हुवे
अब्बास के भी नहर पे बाज़ू कलम हुवे

क़ासिम का सीना छिद गया, अकबर हुवे शहीद
राहे-ख़ुदा में सब ही दिलावर हुवे शहीद

बीमार नौनिहाल को बिस्तर पे छोड़ कर
शब्बीर रन में चल दिये घोड़े को मोड़ कर

सीने में अपने जज़्बा-ए-ईमां लिये हुवे
निकले हैं लब पे आयते-क़ुरआं लिये हुवे

जी-जान ही अज़ीज़ न राहत अज़ीज़ थी
उनको तो करबला में शहादत अज़ीज़ थी

या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

दरिया बहा जो फौज का प्यासे को देखकर
सब काँप उठे नबी के नवासे को देखकर

तीरो-तामिर बरसने लगे शाहे-दीन पर
ख़ूने-हुसैन गिरने लगा जब ज़मीन पर

उस खूं को फिरिस्तों ने दामन में ले लिया
एक बूँद को भी रेत पे गिरने नहीं दिया

या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

ज़ख़्मों से चूर हो गया जो मुर्तज़ा का लाल
सजदे में सर झुका के कहा रब्बे-ज़ुल्जलाल

तेगों के साये में मेरा सजदा क़ुबूल कर
ये आख़री नमाज़ है मौला क़ुबूल कर

इस तरह पूरा हो गया तक़दीर का लिखा
सूखे गले पे चल गया खंज़र लईन का

उम्मत को यूं बचाया शहे-बे-मिसाल ने
सजदे में सर कटा दिया ज़हरा के लाल ने

या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

तुम हो जाने-नबी, तुम हो जाने-अली
या हुसैन इब्ने-अली, या हुसैन इब्ने-अली

 

Sayyid Ne Karbala Mein Wa’de Nibha Diye Hain

 

सय्यिद ने करबला में वा’दे निभा दिये हैं
सय्यिद ने करबला में वा’दे निभा दिये हैं
दीने-मुहम्मदी के गुलशन ख़िला दिये हैं

बोले हुसैन, मौला ! तेरी रिज़ा की खातिर
एक एक कर के मैंने हीरे लुटा दिये हैं

दीने-मुहम्मदी के गुलशन ख़िला दिये हैं

ज़हरा के नाज़-पाले, फूलों पे सोने वाले
करबल की ख़ाक पर वो हीरे लुटा दिये हैं

दीने-मुहम्मदी के गुलशन ख़िला दिये हैं

ज़ैनब के बाग़ में भी दो फूल थे महकते
ज़ैनब ने वो भी दोनों राहे-ख़ुदा दिये हैं

दीने-मुहम्मदी के गुलशन ख़िला दिये हैं

दीने-नबी पे वारी, अकबर ने भी जवानी
अब्बास ने भी अपने बाज़ू कटा दिये हैं

सय्यिद ने करबला में वा’दे निभा दिये हैं
दीने-मुहम्मदी के गुलशन ख़िला दिये हैं

 

Main Ghulam-e-Aale-Nabi Hun

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ ( हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं ) /  ( Husain Aap Ko Dil Se Salam Kehta Hun)
नबी मौला नबी मौला हरदम बोलो
अली मौला अली मौला हरदम बोलो

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

हुज़ूर आप के बच्चोंने दी है क़ुरबानी
इन्हें मुहाफ़िज़े-दीने-दवाम केहता हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

है ला-ज़वाल जहाँ में हुसैन का क़िरदार
कोई हुसैन सा लाओ इमाम, केहता हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

यज़ीद तू ही तो आले-नबी का क़ातिल है
जहन्नमी है सरे-बज़्मे-आम केहता हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

हुसैन पाक के क़दमों पे जां निछावर की
ऐ करबला के शहीदो ! सलाम केहता हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

हुसैन ! सोने का गुम्बद वो जब से देखा है
मैं करबला को भी दारुस्सलाम केहता हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

सलाम आबिदे-बीमार को उजागर का
मैं सारी आले-नबी को सलाम केहता हूं

हुसैन आप को दिल से सलाम केहता हूं
मैं ख़ुद को आले-नबी का ग़ुलाम केहता हूं

मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं
मैं ग़ुलामे-आले-नबी हूँ, मैं ग़ुलामे-आले-अली हूं

नबी मौला नबी मौला हरदम बोलो
अली मौला अली मौला हरदम बोलो

शायर:
निसार अली उजागर

 

Husain Aaj Sar Ko Katane Chale Hain

हुसैन आज सर को कटाने चले हैं
मुहम्मद पे सब कुछ लुटाने चले हैं
हुसैन आज सर को कटाने चले हैं
जो बचपन में नाना से वा’दा किया था
उसे करबला में निभाने चले हैं

मुहम्मद पे सब कुछ लुटाने चले हैं
हुसैन आज सर को कटाने चले हैं

मिलेगा न तारीख़ में ऐसा गाज़ी
लगा दे जो औलाद की जां की बाज़ी
दिखाए कोई उनके जैसा नमाज़ी
जो सजदे में गरदन कटाने चले हैं

मुहम्मद पे सब कुछ लुटाने चले हैं
हुसैन आज सर को कटाने चले हैं

बड़े नाज़ से जिन को पाला नबी ने
जिन्हें रखा पलकों पे मौला अली ने
जिन्हें फ़ातिमा बी ने झूला झुलाया
वो हीं तीर सीने पे खाने चले हैं

मुहम्मद पे सब कुछ लुटाने चले हैं
हुसैन आज सर को कटाने चले हैं

यही केह के अकबर की तलवार चमकी
इधर आ सितमगर, क्या देता है धमकी
जो अकबर निशानी है शाहे-उमम की
अली का वो तेवर दिखाने चले हैं

मुहम्मद पे सब कुछ लुटाने चले हैं
हुसैन आज सर को कटाने चले हैं
जो बचपन में नाना से वा’दा किया था
उसे करबला में निभाने चले हैं

Mere Nabi Ke Pyare Nawase, Mere Pyare Husain

मेरे नबी के प्यारे नवासे, मेरे प्यारे हुसैन /
मौला हुसैन, प्यारे हुसैन
मौला हुसैन, प्यारे हुसैन

मेरी जान हुसैन, ईमान हुसैन
मेरी जान हुसैन, ईमान हुसैन

मेरे नबी के प्यारे नवासे
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मौला अली के दिल के हैं चैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

जिस की माँ फ़ातिमा, नाना नबी हैं
वो शेहज़ादा हुसैन इब्ने अली है

मेरे नबी के प्यारे नवासे
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मौला अली के दिल के हैं चैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

नबी की पुश्त पर ज़हरा का बेटा
सआदत क्या कोई इस से बड़ी है

मेरे नबी के प्यारे नवासे
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मौला अली के दिल के हैं चैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

कोई राहिब से जा कर पूछ आए
हुसैन इब्ने अली कितना सख़ी है

मेरे नबी के प्यारे नवासे
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मौला अली के दिल के हैं चैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

जिसे मेहरोज़ उल्फ़त है नबी से
उसकी शब्बीर से क्या दुश्मनी है

मेरे नबी के प्यारे नवासे
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मौला अली के दिल के हैं चैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

मौला हुसैन, प्यारे हुसैन
मौला हुसैन, प्यारे हुसैन

मेरी जान हुसैन, ईमान हुसैन
मेरी जान हुसैन, ईमान हुसैन

Tajalliyon Ki Kehkashan, Husain Hai Husain Hai

 

तजल्लियों की केहकशां, हुसैन है हुसैन है /
या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम
या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम

तजल्लियों की केहकशां, हुसैन है हुसैन है
इमामे-जुमला-आशिकां, हुसैन है हुसैन है

या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम

जहान में सखाओं का, वफ़ाओं का, अताओं का
है कौन बेहरे-बेकरां ? हुसैन है हुसैन है

या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम

शहादतों की ख़ूने-दिल से करबला की रेत पर
लिखी है जिस ने दास्तां, हुसैन है हुसैन है

या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम

ये सर सिना पे पड़ रहा है आयतें जो बरमला
जो सूए शाम है रवां, हुसैन है हुसैन है

या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम

मैं कैसे नाज़िश उनका नाम लूं न उठते बैठते
मेरा भरम यहां-वहां, हुसैन है हुसैन है

या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम
या हुसैन अस्सलाम, या हुसैन अस्सलाम

Main Hun Husaini Bachpan Se

 

मैं हूँ हुसैनी बचपन से /
मैं हुसैनी हूँ, मैं हुसैनी हूँ
मैं हुसैनी हूँ, मैं हुसैनी हूँ

सब हुसैनी हुसैन हुसैन कहें
सब हुसैनी हुसैन हुसैन कहें

जब से होश संभाला है, माँ ने हमें समझाया है
समझ मे आया उस दिन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

आज यज़ीदी टोला तो इसको जन्नती मानता है
सब डॉलर का चक्कर है, हालां के हक़ जानता है
सारे आइम्मा का फ़तवा यज़ीद काफिरो-फासिक़ है
फ़तवा दिखाऊं किन किन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

जब से होश संभाला है, माँ ने हमें समझाया है
समझ मे आया उस दिन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

नज़रे करम जो हुर्र पे हुई, उनकी क़िस्मत जाग उठी
शाह ने जब कुछ फ़रमाया दिल की काया पलट गई
हुर्र यूँ सब को बताते हैं जन्नत ऐसे पाते हैं
सदा लगाई ये रन्न से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

जब से होश संभाला है, माँ ने हमें समझाया है
समझ मे आया उस दिन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

सब हुसैनी हुसैन हुसैन कहें
सब हुसैनी हुसैन हुसैन कहें

मैं हुसैनी हूँ, मैं हुसैनी हूँ
मैं हुसैनी हूँ, मैं हुसैनी हूँ

मेहफ़िल में सिद्दीको-उमर का जो नारा लगाता है
पंजतन पाक के दीवानो वोही तो अपने वाला है
आशिक़ हूँ मैं सहाबा का, अहले बैत का ख़ादिम हूँ
प्यार मुझे इस बंधन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

जब से होश संभाला है, माँ ने हमें समझाया है
समझ मे आया उस दिन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

काश दुआ ये पूरी हो और मेरी मंज़ूरी हो
पेश-ए-सरवरे-आलम जब क़ब्र में मेरी हुज़ूरी हो
मुझसे फ़रिश्ते तब पूछें, बोल अक़ीदा क्या है तेरा
केह दूंगा में मद्फ़न से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

जब से होश संभाला है, माँ ने हमें समझाया है
समझ मे आया उस दिन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

सुन ए बिलाल, ए ताहिर सुन, तू असली फूलों को चुन
नक़्क़ालों से हो हुश्यार, होगा तेरा बेड़ा पार
जब तू ज़िक्रे हुसैन करे सारी फ़िज़ा बस गूँज उठे
आए सदा तेरे तन-मन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

जब से होश संभाला है, माँ ने हमें समझाया है
समझ मे आया उस दिन से, मैं हूँ हुसैनी बचपन से

मैं हुसैनी हूँ, मैं हुसैनी हूँ
मैं हुसैनी हूँ, मैं हुसैनी हूँ

सब हुसैनी हुसैन हुसैन कहें
सब हुसैनी हुसैन हुसैन कहें

 

Pyare Nabi Ki Aankh Ke Tare Husain Hain

 

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं /
प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

दिल को करार मिलता है नामे-हुसैन से
वल्लाह हमको जान से प्यारे हुसैन हैं

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

रोशन के जिन से इश्क़ो-वफ़ा की तमाम राह
चश्मे-तलब में ऐसे मिनारे हुसैन हैं

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

वो अज़्म हौसला है के जिसकी नहीं मिसाल
सब्रो-रिज़ा के बाब में न्यारे हुसैन हैं

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

ज़ालिम यज़ीद मिट गया ज़िन्दा रहे हुसैन
ये सोचना ग़लत है के हारे हुसैन हैं

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

कोई कमी हुसैन में मुमकिन हो किस तरह
जब दस्ते-मुस्तफ़ा के सवारे हुसैन है

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

वो कौन है जो जान है इस्लाम की उबैद
प्यारे हुसैन हैं, मेरे प्यारे हुसैन हैं

प्यारे नबी की आँख के तारे हुसैन हैं
मौला अली के राज-दुलारे हुसैन हैं

मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन
मेरे प्यारे हुसैन, मेरे प्यारे हुसैन

 

Mera Maula Maula Husain Hai

 

मेरा मौला मौला हुसैन है /
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

जो हुआ नवासा-ए-मुस्तफ़ा, वो अली का बेटा हुसैन है
जो यज़ीदियत को फ़नाह करे, चले करबला वो हुसैन है
बीबी फ़ातिमा का वो लाडला, मेरा बादशाह वो हुसैन है

मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

क्या सुनाऊँ वाक़िया करबला, हाय ! तीर नेज़ा कहाँ लगा
जिसे चूमते रहे मुस्तफ़ा, वो हुसैनी सर था कटा हुवा
सारा घर का घर भी लुटा दिया, वो जो कर गया वो हुसैन है

मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

यहीं बोले हज़रते हुर शहा, या हुसैन आपका शुक्रिया
के यज़ीदियों से निकाल कर, जो हुसैनियों में बिठा दिया
मुझे मन्ज़िलों का पता दिया, मेरा रेहनुमा वो हुसैन है

मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

वो भी बन्दा कितना अजीब है, जो कहे यज़ीद भी ठीक है
या हुसैनी बन या यज़ीदी बन, ऐसे जूट में क्यूँ शरीक है
क्यूँ दो कश्तियों का सवार है, जो है हकनुमा वो हुसैन है

मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

जो दरे-हुसैन पे आ गया, सारी मन्नतों को वो पा गया
ये घराना आले-नबी का है, जो सख़ावतों को सिखा गया
जो फ़क़ीर को करे बादशाह, ऐसा बादशाह वो हुसैन है

मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

ये वज़ीफ़ा है मेरी नौकरी, मैं पढूंगा नादे अली अली
मैं पियूँगा जाम-ए-तरंगरी, मैं लगाऊं नारा-ए-हैदरी
दो उजागर इश्क़ में ये सदा, मुझे मिल गया वो हुसैन है

मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है
मेरा मौला मौला हुसैन है, मेरा मौला मौला हुसैन है

Husain Sa Koi Nahin

हुसैन सा कोई नहीं /
हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

क़ालन्नबीयो सलल्लाहो अलयहे व सल्लम
हुसैनो मिन्नी व अना मिन हुसैन…

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

ज़मीनो-आसमान में हुसैन सा कोई नहीं
ख़ुदा के इस जहाँन में हुसैन सा कोई नहीं

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

लिखा हुआ है लोहे-दिल पे नाम बस हुसैन का
तो दिल के इस मकान में हुसैन सा कोई नहीं

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

लिखेगा कौन इस तरह शहादतों की दास्तां
किसी के ख़ानदान में हुसैन सा कोई नहीं

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

करेगा कौन सामना यज़ीदे-वक़्त का यहाँ
हमारे दरमियान में हुसैन सा कोई नहीं

हुसैन सा कोई नहीं, हुसैन सा कोई नहीं

 

Aaya Na Hoga Is Tarah Husno-Shabaab Ret Par

 

आया न होगा इस तरह हुस्नो-शबाब रेत पर /
आया न होगा इस तरह हुस्नो-शबाब रेत पर
गुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

जान-ए-बतूल के सिवा कोई नहीं खिला सका
कतरा-ए-आब के बग़ैर इतने गुलाब रेत पर

गुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

जितने सवाल इश्क़ ने आले-रसूल से किये
एक के बाद एक दिये सारे जवाब रेत पर

गुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

इश्क़ में क्या बचाइये, इश्क़ में क्या लुटाइये
आले-नबी ने लिख दिया सारा निसाब रेत पर

गुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

प्यासा हुसैन को कहूं इतना तो बे-अदब नहीं
लमसे लबे हुसैन को तरसा है आब रेत पर

गुलशन-ए-फ़ातिमा के थे सारे गुलाब रेत पर

आले-नबी का काम था, आले-नबी ही कर गए
कोई न लिख सका अदीब ऐसी किताब रेत पर

शायर:
अदीब रायपुरी

 

Rooh-e-Shabbir

रूहे-शब्बीर /
रूहे-शब्बीर वो मन्ज़र तो बता जब हुई शहरे-मदीना से जुदाई होगी
ये तो ज़ैनब ही बता सकती है, लौटकर कैसे मदीने में वो आई होगी

कर के रोज़े की तरफ चेहरा ये बोले शब्बीर
हम रहें या न रहें नाना हुज़ूर, हश्र तक आप की उम्मत की भलाई होगी

रूहे-शब्बीर वो मन्ज़र तो बता जब हुई शहरे-मदीना से जुदाई होगी

लाश अकबर की उठा लाए जो ख़ैमों में हुसैन
शेहरबानो ही बता सकती है, किस ग़ज़ब की वो क़यामत थी जो टूटी होगी

रूहे-शब्बीर वो मन्ज़र तो बता जब हुई शहरे-मदीना से जुदाई होगी

जलते ख़ैमों में जुलस्ति हुई सुग़रा मासूम
ऐ फ़लक तूने ये कैसे देखा, तुर्बते-ज़हरा मदीने में दहलती होगी

रूहे-शब्बीर वो मन्ज़र तो बता जब हुई शहरे-मदीना से जुदाई होगी

रख के लाशों को कतारों में ये बोले शब्बीर
तू जो राज़ी है तो हम राज़ी हैं, सरे-तस्लीम के तेरी यहीं मर्ज़ी होगी

रूहे-शब्बीर वो मन्ज़र तो बता जब हुई शहरे-मदीना से जुदाई होगी

नूर को हश्र में रखना है सगों में शब्बीर
तेरी राहों में पड़ा होगा कहीं, आस एक नज़र-ए-इनायत की लगाई होगी

शायर:
नूर अहमद नूर

 

 

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