Fatawa Razvia - Muntakhab Masail - Barkate Raza

Fatawa Razvia – Muntakhab Masail – Barkate Raza

 

फतावा रिजविया से माखूज कुछ खास मसाइल

1⃣ मसअला
” जो नबी ना हो वह नबी के मर्तबा को कभी नहीं पहुँच सकता।”
📕फतावा रज़विया जि 23 सफा 685)

2⃣ मसअला
“काफ़िर औरत से मुसलमान औरत को पर्दा करना जरुरी है।”
📕फतावा रज़विया जि 23 सफा 907)

3⃣ मसअला
“क़ुरान पाक का तर्जुमा दूसरी जुबान में करना जाइज़ है।”
📕 फतावा रज़विया जि 23 सफा 709)

4⃣ मसअला
“हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहे वसल्लम का ज़िक्रे पाक करना बेहतरीन इबादत है।”
📕 फतावा रज़विया जि 23 सफा 724)

5⃣ मसअला
“मिलाद शरीफ के एखतेताम पर खड़े होकर हुज़ूर की बारगाह में सलाम पढ़ना बेहतर है।”
📕 फतावा रज़विया जि 23 सफा 729)

6⃣ मसअला
“फ़ासिक़ ( जैसे नमाज़ ना पढ़ने वाला झूट बोलने वाला वगैरहुम)
से महफ़िल में किरत करवाना नात पढ़वाना तकरीर करवाना दुआ करवाना वगैरा सब हराम है।”
📕फतावा रज़विया जि 23 सफा 734)

7⃣ मसअला
> मुसलमान पर अज़ाब होगा मगर
उसपर आख़िरत में अल्लाह की लानत ना होगी
📕(फतावा रज़विया जि. 14 सफा 287)

8⃣ मसअला
> नाचने गाने का पेशा हराम कतई है
अगर कोई उसे हलाल जाने तो कुफ़्र है
📕(फतावा रज़विया जि. 23 सफा 583)

9⃣ मसअला
> किसी काफ़िर के यहां नौकरी करना उस वक़्त जाएज़ है जबकि कोई शरीअत के खिलाफ काम ना करना पड़े
📕 (फतावा रज़विया जि.23 सफा 591)

1⃣0⃣ मसअला
क़ादियानी बल्कि हर बद अक़ीदा वहाबी देवबंदी मौदूदी शिया तबलीगी वगैरा उसके साथ ना कुछ खाये ना पियें
ना उससे रिश्ता रखे बल्कि उससे बात ही करने की इज़ाज़त नहीं
हुज़ूर ने फ़रमाया
उनसे दूर रहो और उन्हें अपने से दूर रखो
📕 (फतावा रज़विया जि. 23 सफा 598)

1⃣1⃣ मसअला
शौहर बीवी के इंतेक़ाल के बाद उसको गुस्ल नहीं दे सकता है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 234)

1⃣2⃣ मसअला बजने वाला जेवर औरत को इस सूरत में पहनना जाएज़ है के उसकी आवाज़ गैर मेहरम तक ना पहुचे
वरना नाजाइज़ है
📕(फतावा रज़विया जि. 22 सफा 128)

1⃣3⃣ मसअला
फ़ासिक़ (दाढ़ी मुंडाने वाला नमाज़ ना पढ़ने वाला झूट बोलने वाला वगैरहुम) से महफ़िल में किरत करवाना नात पढ़वाना तकरीर करवाना दुआ करवाना वगैरा àसब हराम है
📕 (फतावा रज़विया जि.23 सफा 734)

1⃣4⃣ मसअला
ये कहना कि..
दाढ़ी मुंडाने वाला दाढ़ी रखने वाले से बेहतर है तो ये कलमए कुफ़्र है
📕 (फतावा रज़विया जि.23 साफ़ 736)

1⃣5⃣ मसअला
अवाम पर उलमाए दीन का अदब बाप से जियादा फ़र्ज़ है
📕(फतावा रज़विया जि. 25 सफा 2016)

1⃣6⃣मसअला
हुज़ूर की ताज़ीम व तौकीर करना मुसलमान के लिए ऎने ईमान है
📕(फतावा रज़विया जि. 23 सफा 764)

1⃣7⃣ मसअला
नाख़ून बगल का बाल नाफ के नीचे का बाल 40 दिन से पहले निकाल लें वरना गुनाहगार होगा
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 678)

Fatawa Razvia – Muntakhab Masail – Barkate Raza

1⃣8⃣ मसअला
किसी मय्यत को जनाजा पढ़े बगैर दफ़न कर दिया तो जबतक उसके सलामत होने का गुमान हो उसके कब्र पर जाकर नमाज़े जनाजा पढ़े
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 478)

1⃣9⃣ मसअला
बतौरे ताजीम क़ुरआन मुक़द्दस को सर आँख सीने से लगाना जाइज़ है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 478)

2⃣0⃣ मसअला
औरतें आपस में एक दूसरे से सलाम करें
और मर्द जवान औरत को सलाम ना करें
और बूढी को करने की इजाजत है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 563)

2⃣1⃣ मसअला
अज़नबी जवान औरत सलाम करे तो मर्द दिल में जवाब दें
और मर्द जवान औरत को सलाम ना करें
और बूढी को करने की इज़ाज़त है
📕(फतावा रज़विया जि 22 563/408)

2⃣2⃣ मसअला
वजू करने वाले को किसी ने सलाम किया
तो वह जवाब दे सकता है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 569)

2⃣3⃣ मसअला
ससुर से पर्दा करना वाजिब नहीं (जवान हो तो बेहतर है) इसी तरह जवान सास के लिए दामाद से
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 240)
2⃣4⃣ मसअला
जवान सास के लिए दामाद से पर्दा है
📕 (फतावा रज़विया जि 22 सफा 240)

2⃣5⃣ मसअला
औरत का इस तरह से खुश इलहान से पढ़ना की उसकी आवाज़ गैर महरम तक जाए हराम है
📕 (फतावा रज़विया जि 22 सफा 242)

2⃣6⃣ मसअला
बालिग़ के बदन पर ना महरम (जिससे शादी करना जाइज़ हो) का उबटन मलना हराम है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 245)

2⃣7⃣मसअला
औरत का गैर महरम के हाथ से चूड़ी पहनना हराम है
और शौहर राजी हो तो दय्युस है(और दय्युस के लिए जहन्नम है)
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 247)

2⃣8⃣ मसअला
बद अक़ीदा वहाबी देवबंदी तबलीगी वगैरा से अपने बच्चों को पढ़वाना हराम है
📕 (फतावा रज़विया जि.23 सफा 682)

Fatawa Razvia – Muntakhab Masail – Barkate Raza

2⃣9⃣ मसअला
बदअक़ीदा उस्ताद का सुन्नी शागिर्द पर वही हक़ है जो शैतान का फरिश्तों पर है यानी फरिस्ते शैतान पर लानत भेजते हैं और क़यामत के दिन घसीट कर दोजख में फेंक देंगे
📕 (फतावा रज़विया जि. 23सफा707)

3⃣0⃣ मसअला
देवबंदी को मुसलमान जानकर उसकी तकरीर सुनना मसअला पूछना मेलजोल रखना कुफ़्र है 📕(फतावा रज़विया जि.23सफा710)

3⃣1⃣ मसअला
जाहिल को शरीअत का हाकिम बनाना हराम है
📕 (फतावा रज़विया जि.23सफा714)

3⃣2⃣ मसअला
वाज तकरीर करना आलिम का मंसब है जाहिल को वाज तकरीर करना हराम है
📕(फतावा रज़विया जि.23 सफा 717)

3⃣3⃣ मसअला
आपस में मुआनका (गले मिलना) जाइज़ है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 251)

3⃣4⃣ मसअला
दोनों हाथ से मुसाफा करना मनदुब व मसनून है
और गुनाह दरख़्त के पत्ते की तरह झड़ जाते हैं
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 270/
3⃣5⃣ मसअला
जब कोई मुसलमान जो एक निवाला अल्लाह की राह में खर्च करता है तो अल्लाह तआला उसे इतना बढ़ाता है की वह उहद पहाड़ के बराबर हो जाता है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 276)

3⃣6⃣ मसअला
इमाम बुखारी को 6 लाख
इमाम मुस्लिम को 3 लाख इमाम अहमद बिन हम्बल को 10 लाख
हदीस याद थी
📕 (फतावा रज़विया जि 22 सफा 294)

3⃣7⃣ मसअला
हुज़ूर का मुबारक नाम सुनकर अंगूठा चूमकर आँखों से लगाना बेहतर है
मगर ख़ुत्बा नमाज़ तिलावते क़ुरआन के वक़्त ना चूमें
📕 (फतावा रज़विया जि 22 सफा 316)

3⃣8⃣ मसअला
काफ़िर को बिला जरुरत सलाम करना नाजाइज़ है
जरुरत पर लाला साहब या बाबू साहब वगैरा कह दें
बगैर सर झुकाये सरपर हाथ रखे और अगर वह सलाम करे तो उसके जवाब में अलैका कहें या सलाम ही कह दें
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 317)

3⃣9⃣ मसअला
जिस तरह मर्द के लिए हराम है की गैर महरम औरत को देखे
इसी तरह औरत के लिए हराम है की गैर महरम मर्द को देखे
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 201)

4⃣0⃣ मसअला
मुश्त जनी (हाथ से मनि निकालना) करना हराम है और ऐसे शख्स पर लानत है
📕(फतावा रज़विया जि 22 सफा 202)

4⃣1⃣ मसअला
बुरों की सोहबत से दूर रहना जरुरी है और इसी में भलाई है
📕 (फतावा रज़विया जि 22 सफा 205)

4⃣2⃣ मसअला
गैर महरम पीर से भी औरत को पर्दा करना जरुरी है
📕 (फतावा रज़विया जि 22 सफा 205)

 

Aa Gaye Aa Gaye Mustafa Aa Gaye View Lyrics

Aa Jaaye Bulawa Mujhe Aaqa Tere Dar Se View Lyrics

Aaj Ashk Mere Naat Sunain To Ajab Kya View  Lyrics

Aaj Muhammad Aye Moray Ghar View Lyrics

Aaka Ko Pukar Bande Aaka Ko Pukar View Lyrics

Aakhri Lamhon Mein Kya Shehr O Biyabaan Dekhun View Lyrics

Alahazrat Ka Danka Bajega View Lyrics

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.