सर से लेकर क़दम तक है वो मोजज़ा Lyrics

 

सर से लेकर क़दम तक है वो मोजज़ा उनका जलवा कोई क्या समझ पायेगा
जिनकी कसमे खुदा खाए क़ुरआन में उनका रुत्बा कोई क्या समझ पायेगा

कितना बरतर व बाला है क़दमे नबी, चूमते है अदब से भी रुहुल अमीं
जिनके नालेन को चूमे अर्शे बरीं उनका तलवा कोई क्या समझ पायेगा

दस्ते क़ुदरत से जिनकी जुदा रूह हुई, सय्यदा फातिमा की है अज़मत बड़ी
जिनको देखा नही है फरिश्तों ने भी उनका पर्दा कोई क्या समझ पायेगा

इक नवासे की तिशनालबी है अज़ब, यानी शब्बीर की बंदगी है अज़ब,
जो झुके तो कयामत तलक न उठे, ऐसा सजदा कोई क्या समझ पायेगा

खाए जाती है यही फ़िक्र सितमगारो को
कर्बला मरने नहीं देती है वफादारों को

हदीसे इश्क़ की रोशन कोई तफ़्सीर लिख देंगे
ज़मीने कुफ्र पर हम नाराए तकबीरे लिख देंगे
हमारे जिस्म में हर दम हुसैनी खून रहता है
जहाँ भी कर्बला देखेंगे हम शब्बीर लिख देंगे

देख कर राजा कासा ये कहने लगा मेने ख़्वाजा पे पानी किया बन्द था
क्या पता था कि सागर समा जायेगा उनका कासा कोई समझ पायेगा

अहले सुन्नत के ओलमा का है फैसला इस सदी के मुजद्दिद है मदनी मिया
देखना होगा इक दिन जमाना उधर मेरा मदनी मिया हा जिधर जायेगा

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