मेरा मेरा मेरा नबी है

 

मेरा मेरा मेरा नबी है

बच्चा भी बोले नबी नबी
बूढ़ा भी बोले नबी नबी
ताक़त ही ताक़त नबी नबी
क़ुव्वत ही क़ुव्वत नबी नबी
मैदाने-बदर और ख़न्दक में
गज़वा-ए-ओहद के लश्कर में
ये सारे सहाबा केहते थे
जीने का सहारा नबी नबी
मैं मर जाऊं तो नबी नबी
मेरे कफ़न पे लिखना नबी नबी
मेरी क़बर पे लिखना नबी नबी
मेहशर में बोलू नबी नबी
हो मेरी शफ़ाअत नबी नबी
मीज़ाने-अमल पे नबी नबी
जब पुल से गुज़रूँ नबी नबी
तो पार लगा दे नबी नबी
फिर झूम के बोलूं नबी नबी
जन्नत में चलाऊं नबी नबी

मेरा मेरा मेरा नबी है

मुस्तफ़ा की सब से ऊँची शान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मेरे सिध्धिको-उमर, उस्मां-अली
चारों ही हक़ पर हैं याराने-नबी
चार यारों का यहीं नारा रहा
मेरा तो सब कुछ है बस मेरा नबी
हर सहाबी का यहीं ऐलान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मुस्तफ़ा की आँख का तारा अली
जानों-दिल से है हमें प्यारा अली
अहले-हक़ की मेहफ़िलों में आज भी
गूंजता है हर तरफ नारा अली
मुरतज़ा तो मुस्तफ़ा की जान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मुस्तफ़ा की सब से ऊँची शान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

आँख से अश्के-वफ़ा बेहते रहे
ज़ालिमों के ज़ुल्म भी सेहते रहे
मुस्तफ़ा के इश्क़ में हज़रत बिलाल
या नबी, या मुस्तफ़ा केहते रहे
ये बिलाली इश्क़ का फरमान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मेरा मेरा मेरा नबी है

अल्लाह का प्यारा नबी नबी
काअबे का काअबा नबी नबी
मेरा एक ही नारा नबी नबी
मेरा लहू पुकारा नबी नबी
सिध्धिके अकबर ने बोला
फ़ारूक़े-आज़म का नारा
उस्माने-गनी, हैदर मौला
सब ने ही पुकारा नबी नबी
ज़हरा के बाबा नबी नबी
हसनैन के नाना नबी नबी
करबल की ज़मीं पर
अकबर की सदा थी नबी नबी

मेरा मेरा मेरा नबी है

इश्क़ यूं अपना लिया सिध्धिक ने
मुस्तफ़ा को पा लिया सिध्धिक ने
आंच न आए नबी पर इस लिये
सांप से डसवा लिया सिध्धिक ने
आशिक़े-सादिक़ की ये पेहचान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मुस्तफ़ा की सब से ऊँची शान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

ख़्वाबे-आसारे-तरक्की तोड़िये
चाँद पर जाने की बातें छोड़िये
चाँद जिनके एक इशारे पर चले
उस नबी से अपना रिश्ता जोड़िये
चाँद भी इस चाँद पर क़ुर्बान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

पीरे-कामिल मुर्शिदी अत्तार ने
दावते-इस्लामी का तोहफा दिया
मदनी चैनल देखते ही देखते
घर का घर सारा नमाज़ी बन गया
आक़ा की सुन्नत का ये फैज़ान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मुस्तफ़ा की सब से ऊँची शान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

माँ ने बचपन में हमें सिखला दिया
आक़ा की सुन्नत कभी ना छोड़ना
कोई ग़म हो कैसे ही हालात हों
बारवी और ग्यारवी ना छोड़ना
इनके सदक़े ज़िन्दगी आसान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

हो सदाक़त का हुनर गुफ़्तार में
रोशनी पैदा करो क़िरदार में
हो चमक ईमान में कातिब वहीं
जो चमक थी हैदरी तलवार में
मुस्तफ़ाई की यहीं पेहचान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

मुस्तफ़ा की सब से ऊँची शान है
मेरा नबी मेरा ईमान है

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