ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं

 

ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
हो करम मुझ पे या सय्यिदल-मुरसलीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

दूर रेह कर न दम टूट जाए कहीं, काश ! त़यबा में ऐ मेरे माहे-मुबीं
दफ्न होने को मिल जाए दो गज़ ज़मीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
हो करम मुझ पे या सय्यिदल-मुरसलीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

कोई हुस्ने-अ़मल पास मेरे नहीं, फंस न जाऊ क़ियामत में मौला कहीं
ऐ शफ़ी-ए़-उमम लाज रखना तुम्हीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
हो करम मुझ पे या सय्यिदल-मुरसलीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

अब मदीने में हम को बुला लीजिए, और सीना मदीना बना दीजिए
अज़ पए ग़ौसे-आज़म इमामे-मुबीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
हो करम मुझ पे या सय्यिदल-मुरसलीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

इ़श्क़ से तेरे मा’मूर सीना रहे, लब पे हर दम ‘मदीना-मदीना’ रहे
बस मैं दीवाना बन जाऊं सुल्त़ानें-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
हो करम मुझ पे या सय्यिदल-मुरसलीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

अब बुलालो मदीने में अत्तार को, अपने क़दमों में रख लो गुनहगार को
कोई इस के सिवा आरज़ू ही नहीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

ताजदारे-ह़रम ऐ शहन्शाहे-दीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम
हो करम मुझ पे या सय्यिदल-मुरसलीं, तुम पे हर दम करोड़ों दुरूदो सलाम

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