चलो दियारे-नबी की जानिब दुरूद लब पर सजा सजा कर

 

चलो दियारे-नबी की जानिब दुरूद लब पर सजा सजा कर
बहारें लूटेंगे हम करम की दिलों को दामन बना बना कर

स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह
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है उन को उम्मत से प्यार कितना ! करम है रहमत शिआर कितना !
हमारे जुर्मों को धो रहे हैं, हुज़ूर आँसू बहा बहा कर

स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह

मैं वो निकम्मा हूं जिस की झोली में कोई हुस्ने-अमल नहीं है
मगर वो एहसान कर रहे हैं खताएं मेरी छुपा छुपा कर

स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह

न उनके जैसा सख़ी है कोई, न उनके जैसा गनी है कोई
वो बे-नवाओं को हर जगह से नवाज़ते हैं बुला बुला कर

स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह

अगर मुक़द्दर ने यावरी की, अगर मदीने गया मैं ख़ालिद
क़दम क़दम ख़ाक उस गली की मैं चूम लूंगा उठा उठा कर

स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह
स़ल्ला अ़लैक या रसूलल्लाह, व सल्लम अ़लैक या ह़बीबल्लाह

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